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जब द्रविड़ पर आया था तेंदुलकर को गुस्सा, कहा था- अकेला छोड़ दो मुझे

TalkToday 2018-01-11 12:25:00

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को हुआ था, आज वो अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। राहुल की कप्तानी टीम इंडिया के लिए मिली-जुली रही। द्रविड़ की कप्तानी की चर्चा करते ही सबसे पहले मुल्तान टेस्ट मैच याद आ जाता है, जिसमें वीरेंद्र सहवाग ने ट्रिपल सेंचुरी जड़ी थी और सचिन तेंदुलकर डबल सेंचुरी जड़ते-जड़ते रह गए थे। राहुल ने अपनी कप्तानी में एक ऐसा फैसला ले लिया था, जिसने उन्हें 'विलेन' बना दिया था। इतना ही नहीं खुद सचिन तेंदुलकर भी द्रविड़ से खासा नाराज हो गए थे।

2004 में 28 मार्च से 1 अप्रैल के बीच भारत और पाकिस्तान के मुल्तान में टेस्ट मैच खेला जा रहा था। वीरेंद्र सहवाह ने यादगार 309 रनों की पारी खेली थी, जिसके बाद उन्हें 'मुल्तान का सुल्तान' कहा गया। टीम इंडिया का स्कोर जब पांच विकेट पर 675 रन था, तो उस समय के कप्तान द्रविड़ ने भारत की पारी की घोषणा कर दी। चौंकाने वाली बात ये थी कि उस समय तेंदुलकर नॉटआउट थे और 194 रन बनाकर खेल रहे थे।

द्रविड़ के इस फैसले के कारण उनकी खूब आलोचना हुई थी। तेंदुलकर अपने दोहरे शतक से महज छह रनों से चूक गए थे। खुद तेंदुलकर को ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आई थी। मैच के बाद तेंदुलकर का गुस्सा इस बात से झलक गया था, जब उन्होंने कहा, 'इस फैसले का कोई मतलब नहीं बनता था।'
हालांकि उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी में ये भी साफ किया कि इस घटना का असर उनकी और द्रविड़ की दोस्ती पर नहीं पड़ा। तेंदुलकर ने ऑटोबायोग्राफी में बताया, 'इस घटना के बावजूद मैं इस बात से खुश हूं कि मेरे और द्रविड़ के बीच रिश्ते सामान्य रहे और हम अच्छे दोस्त बने रहे। ना हमारे क्रिकेट और ना ही हमारी दोस्ती पर इसका कोई असर पड़ा।'