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इसरो ने रचा कीर्तिमान, 100वें सैटेलाइट मिशन से छोड़े 31 उपग्रह

YourStory 2018-01-12 12:40:38
सहयात्री उपग्रहों में भारत की तरफ से एक माइक्रोसैटेलाइट और एक नैनोसैटेलाइट है। इसके अलावा बाकी 6 देशों से 25 नैनोसैटेलाइट भेजे गाए हैं। 

इस साल 2018 के प्रारंभ में भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी दो चंद्र अभियान शुरू करेगी। चंद्रयान-2 इससे पहले के चंद्रयान-1 का परिष्‍कृत संस्‍करण होगा। इसके अंतर्गत स्‍वदेशी क्षमता से निर्मित आर्बिटर, लैंडर और रोवर का निर्माण किया जाएगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी इसरो ने शुक्रवार को PSLV-C40 सीरीज सैटेलाइट मिशन के तहत अपना 100वां सैटेलाइट, कार्टोसैट-2 को भेजकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर लिया है। इसमें कनाडा, फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन के 28 और भारत के भी तीन सैटेलाइट शामिल हैं। इस सैटलाइट को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस रिसर्च सेंटर से सुबह साढ़े नौ बजे प्रक्षेपित किया गया। कार्टोसैट-2 सीरीज के इस मिशन के सफल होने के बाद धरती की अच्छी गुणवत्ता वाली तस्वीरें मिलेंगी। इन तस्वीरों का इस्तेमाल सड़क नेटवर्क की निगरानी, अर्बन ऐंड रूरल प्लानिंग के लिए किया जा सकेगा।



भारत के पोलर सैटेलाइट लॉन्च वीकल (PSLV) ने अपनी 42वें अभियान के तहत (PSLV-C40) से 710 किलो का कार्टोसैट सीरीज का सैटेलाइट लॉन्च किया है। इसके साथ ही र्टोसेट-2 श्रृंखला के उपग्रह और 30 सह-यात्रियों को भी भेजा गया है जिनका कुल वजन करीब 613 किलोग्राम है। सहयात्री उपग्रहों में भारत की तरफ से एक माइक्रोसैटेलाइट और एक नैनोसैटेलाइट है। इसके अलावा बाकी 6 देशों से 25 नैनोसैटेलाइट भेजे गाए हैं। इनमें कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। PSLV-C40 पर सभी 31 सैटेलाइट्स का वजन लगभग 1323 किलोग्राम है।

भारत ने बीते साल 5 जून को अपने सबसे शक्तिशाली, स्‍वदेश निर्मित और अब तक के सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-19 को भू स्थिर अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहन मार्क-III (जीएसएलवी एमके- III डी 1) के जरिए प्रक्षेपित कर अंतरिक्ष टेक्‍नोलाजी के क्षेत्र में दुनिया के गिने-चुने अग्रणी देशों की जमात में अपनी जगह बनायी। 3,136 किग्रा वजन के इस उपग्रह ने चार टन तक के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की इसरो की क्षमता को साबित कर दिया। इससे स्‍वदेशी क्षमता से क्रायोजेनिक इंजन बनाने की हमारी क्षमता का भी परीक्षण हुआ और भविष्‍य में मनुष्‍य को धरती के वायुमंडल से दूर अंतरिक्ष में भेजने का मार्ग प्रशस्‍त हो गया। अब भारत अपने संचार उपग्रहों को खुद ही अंतरिक्ष में भेज सकता है। अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस, यूरोप, चीन और जापान ने 4 हजार किग्रा या इससे अधिक वजन के उपग्रहअंतरिक्ष में प्रक्षेपित किये थे।



इससे पहले बीते साल 5 मई को भारत ने पहला दक्षिण एशिया उपग्रह (एसएएस) अंतरिक्ष में छोड़ कर अपने छह पड़ोसी देशों अफगानिस्‍तान, बंगलादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका के बीच संचार को बढ़ावा देने और आपात संपर्क मजबूत करने में कामयाबी हासिल की थी। इसरो निर्मित और पूरी तरह भारत द्वारा वित्‍त पोषित 2,230 किग्रा वजन के जीसैट-9 उपग्रह के जीएसएलवी-एफ09 राकेट से प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस अभूतपूर्व घटनाक्रम से दुनिया को यह संदेश गया है कि अगर क्षेत्रीय सहयोग का सवाल है तो आसमान भी इसकी सीमा नहीं बन सकता।