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मध्यवर्गीय परिवार के सुख-दुख समेटे है फिल्म

Dainik Tribune 2018-01-13 00:57:57

फिल्म समीक्षा
मुक्काबाज एक ऐसे युवक की कहानी है, जो मुक्क्बाज बनना चाहता है, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर है। ऐसे में वह न केवल अपने विरोधियों से, बल्कि किस्मत से भी लड़ाई करता है। वह माइक टायसन बनना चाहता है। फिल्म में जाति की राजनीति के साथ खेलकूद और कार्यालय में राजनीति का पुट है। अनुराग कश्यप ने अपने अंदाज में फिल्म में मध्यवर्गीय परिवार के सुख-दुख, सामान्य पिता-पुत्र, पति-पत्नी की बानगी को संजीदगी के साथ पिरोया है।  फिल्म में प्रोफेशनल बाॅक्सर नीरज गोयट का किरदार आपको सीट से बांधने की ताकत रखता है। वहीं जोया हुसैन की यह पहली फिल्म है, लेकिन सुनैना के रोल में वह जबरदस्त लगी है। वहीं जिम्मी शेरगिल ने भगवान के किरदार से बता दिया है कि असल में भगवान दास ऐसा ही हो सकता है।  इसलिए रचीता सिंह की तारीफ की जानी चाहिए। कुल मिलाकर फिल्म अच्छी है।
एक रात और 6 लोगों की कहानी है कालाहांडी
एक और फिल्म रिलीज हुई है कालाकांडी। डेहली बेली के साथ बाॅलीवुड में बतौर राइटर कदम रखने वाले अक्षत वर्मा ने इस फिल्म का  निर्माण किया है। वह यहां डायरेक्टर हैं और एक रात और 6 लोगों की कहानी को पिरोया है। दरअसल कालाकांडी एक बैंकर सैफ अली खान की कहानी है? जो बहुत ही संयमित जिंदगी जीता है। न नशा न ही कोई गलत काम। लेकिन जब उसे खबर मिलती है कि वह कैंसर का रोगी है तो उसका पूरा वजूद ही हिल जाता है। सैफ अली खान अपनी जिंदगी बदलने की राह पर निकल पड़ते हैं। फिर सैफ अली खान वह सब काम करते हैं जो उन्होंने पहले नहीं किए थे। फिल्म में सैफ अली खान ने अच्छी एक्टिंग की है। लेकिन वे इस तरह के रोल के लिए परफेक्ट चाॅयस नहीं हैं। विजय राज और दीपक डोबरियाल ने अपने किरदार के साथ न्याय किया है। जबकि शोभिता धूलिपाला ने माॅडर्न वूमन के किरदार को अच्छे से निभाया है, लेकिन कुछ भी यादगार नहीं है।

-धर्मपाल