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मिली ऐसी सजा कि चमक गई किस्मत, मेडल के साथ ही पैसे भी बरसने लगे

Live India 2018-01-13 09:01:00
New Delhi:  कभी-कभी दी गई सजा भी वरदान साबित हो जाती है, लोगों को वहां तक पहुंचा देती है, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होती है। ऐसा ही दीप्ति के भी साथ हुआ जानिए- 

सजा के बाद मिली सफलता का जीता-जागता उदाहरण हैं, झारखंड से हिसार पहुंचीं हॉकी खिलाड़ी दीप्ति कुल्लू। वह यहां पर सब जूनियर नेशनल वुमेन हॉकी प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंची हैं। दरअसल, दीप्ति जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहां हॉकी खेलना जरूरी था, नहीं तो सजा दी जाती थी। सजा के रूप में विद्यार्थियों से स्कूल में साफ-सफाई कराई जाती थी। 


सजा से बचने के लिए ही दीप्ति को भी हॉकी खेलना पड़ता था। उसे खुद भी नहीं मालूम था कि स्कूल का नियम पूरी तरह से उनके जीवन को बदल देगा। सजा से बचने के लिए हॉकी थामी तो मुकाम हासिल हो गया। दीप्ति जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहां हॉकी खेलना अनिवार्य था, वरना विद्यार्थियों को सजा दी जाती थी। सजा के रूप में विद्यार्थियों से स्कूल में साफ-सफाई कराई जाती थी। सजा से बचने के लिए उसे भी खेलना पड़ता था। उसे खुद भी नहीं पता था कि स्कूल का नियम पूरी तरह से उनके जीवन को बदल देगा।


झारखंड के सिमडेगा की रहने वाली दीप्ति ने बताया कि उसने आरसी मद स्कूल में करगागुड़ी सिमडेगा में 5वीं तक पढ़ाई की। उस स्कूल में हॉकी खेलना अनिवार्य था। स्कूल में सभी को अपने साथ हॉकी लेकर जाना होती थी। 5वीं क्लास पूरी होने के बाद उसका एसएस गल्र्स हॉकी सेंटर सिमडेगा में चयन हुआ। अब वही 9वीं क्लास में पढ़ रही है। और वह झारखंड की सब जूनियर नेशनल हॉकी टीम में मिड फिल्डर की भूमिका निभाती है।

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बता दें कि दीप्ति के पिता जूलियस कुल्लू किसान है। वहीं दीप्ति के 5 भाई-बहन है। दीप्ति का कहना है कि वह गरीब परिवार से है। सरकार से मिलने वाली राशि से अन्य परिवार की तरह अपने परिवार को भी ऊंचा उठाना चाहती है। उसका मुख्य उद्देश्य इंडिया टीम में जाना है। 


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