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वैज्ञानिकों ने खोजे धरती से तीन गुना बड़े 5 नए एक्सोप्लैनट्स, जानिए क्या है उनमें खास

Dainik Savera Times 2018-01-13 16:25:12

बोस्टनः सिटीजन वैज्ञानिकों ने सौर मंडल के बाहर पांच नए एक्सोप्लैनट्स की खोज की है। धरती से 620 प्रकाश वर्ष दूर इन एक्सोप्लैनट्स की खोज में वैज्ञानिकों ने नासा के कैप्लर स्पेस टेलीस्कोप की मदद ली है। अमेरिका स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) के शोधकर्ताओं के मुताबिक, ये पांचों एक्सोप्लैनट्स सूर्य जैसे तारे की परिक्रमा कर रहे हैं और इनका आकार धरती से दो से तीन गुना ज्यादा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये पांचों एक्सोप्लैनट्स बेहद गर्म हैं। इनका तापमान 800-1800 डिग्री फारेनहाइट के बीच में है। ये ग्रह अविश्वसनीय रूप से अपने तारे के बेहद करीब हैं।

इन्हें उसका पूरा चक्कर लगाने में 13 दिन लगते हैं। एक सिटीजन साइंस वेब पोर्टल के अनुसार, इस प्रोजेक्ट का नाम एक्सोप्लैनट एक्सप्लोरर्स रखा गया। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट को ऑस्ट्रेलिया ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन पर लाइव टेलिकास्ट किया गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पांचों ग्रहों का आकार पृथ्वी और नेपच्यून के बीच का है। सी, डी, ई और एफ जैसे ग्रहों में बर्फ और गैस होने की संभावना अधिक है। पृथ्वी से महज 96 किमी ऊपर के अंतरिक्ष क्षेत्र को अब तक अच्छी तरह नहीं समझा जा सका है। अब नासा इसके लिए दो मिशन लांच करने की तैयारी में है।

पहला मिशन इसी महीने और दूसरा अगले साल अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने गुरुवार को एलान किया कि 'ग्लोबल-स्केल ऑब्जर्वेशन ऑफ द लिम्ब एंड डिस्क' (गोल्ड) मिशन को जनवरी 2018 में लांच किया जाएगा। वहीं अंतरिक्ष यान 'आयनोस्फेयरिक कनेक्शन एक्सप्लोरर' (आइकान) को अगले साल अंतरिक्ष में रवाना किया जाएगा। ये दोनों मिशन धरती और अंतरिक्ष की सीमा के बीच वाले क्षेत्र यानी आयनमंडल (आयनोस्फेयर) की पड़ताल करेंगे। इसी मंडल में सूर्य के विकिरण से अणु विद्युत आवेशित इलेक्ट्रॉन और आयन के संपर्क में आते हैं।

धरती से प्रेषित रेडियो तरंगें भी इसी मंडल से परावर्तित होकर दोबारा पृथ्वी पर लौट जाती हैं। इसलिए विमानों, समुद्री जहाजों और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपग्रहों में रेडियो सिग्नलों के इस्तेमाल के लिए इस मंडल में मानवीय दबदबा बढ़ता जा रहा है। नासा ने कहा कि दोनों मिशन एक-दूसरे के पूरक हैं। आइकान मिशन 560 किमी ऊपर से धरती की परिक्रमा करेगा। यह आयनमंडल के पास से उड़ान भरेगा। जबकि गोल्ड भू-भौगोलिक कक्षा यानी वेस्टर्न हेमिस्फिर से धरती की परिक्रमा करेगा। यह क्षेत्र धरती की सतह से करीब 35 हजार किमी ऊपर है। यह अंतरिक्ष यान आयनमंडल की पूरी आकृति तैयार करेगा। ये दोनों मिशन उस समय एक-दूसरे का सहयोग कर भी सकते हैं जब आइकान गोल्ड के पास से गुजरेगा।