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दिमाग लगाओ कार भगाओ, Nissan लाई अनोखी टेक्निक

Freaky Funtoosh 2018-01-13 20:07:51

टोक्यो। आपने विदेश में एक लड़की द्वारा कंप्युटर जनरेटेड सिस्टम के माध्यम से कार को आॅपरेट करने का वीडियो देखा होगा। इस वीडियो में लड़की जब अपने आॅफिस पहुंचती है तो कार को आॅटो मोड में कर देती है जिससे कार कंप्युटर जनरेटेड सिस्टम से पार्किंग तक पहुंचकर पार्क हो जाती है। यह तो हुई वीडियो की बात लेकिन, अब एक ऐसी तकनीक लाॅन्च होने जा रही है। जिसमें व्यक्ति के सोचने – समझने के आधार पर कार ड्राइव होगी। इस तरह की  ब्रेन टू व्हीकल तकनीक जापान ने तैयार की है। जिसमें कार दिमाग के इशारे से चलेगी।

 

जापान की आॅटोमोबाईल कंपनी निसान ने इस तरह की कार ड्राइविंग तकनीक प्रारंभ की। कार में यूज़ होने वाली बी 2 वी तकनीक से कार चलाने पर, कार 0.2 सेकंड से 0.5 सेकंड की तेजी से कंट्रोल हो जाती है। निसान जैसी कंपनी ने कार में ‘ब्रेन टू व्हीकल’ इस तरह की तकनीक लाॅन्च की है। इससे संभावना है कि जल्द ही आॅटोमोबाईल सेक्टर में कुछ अन्य कंपनियां महत्वपूर्ण बदलाव कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो फिर ड्राइवरलेस कारें बढ़ जाऐंगी और फिर व्यक्ति केवल रिमोट या कंप्युटर जनरेटेड सिस्टम से कार को कंट्रोल कर सकेगा।


इससे भी आगे जिस तरह से निसान ने तकनीक इजाद की है उसी तरह से अन्य कंपनियां व्यक्ति के दिमाग पर आधारित मैसेजेस को या दिमाग के इशारों से कार को चला सकेगा। जापान की लोकप्रिय कार निर्माता कंपनी निसान ने जिस तरह की तकनीक लाॅन्च की है, उसके मार्केट में आने के बाद शायद आॅटोमोबाईल सेक्टर में काॅम्पीटिशन बढ़ जाएगा। हो सकता है कि कार के अलावा दूसरे आॅटो मोबाईल वाहन में भी आॅटो पायलेटिंग मोड की टेक्निक अपनाई जा सकती है जिससे व्हीकल ड्राइविंग बेहद आसान हो सकेगी। निसान जिस तकनीक की कार लेकर आ रहा है उस तकनकी को ब्रेन टू व्हीकल नाम दिया गया है।

 

इस तकनीक से लोगों को कार चलाने में बेहद आसानी होगी। यदि आप कई हजार किलोमीटर के सफर पर हैं और ऐसे में आपको ड्राईवर साथ में रखने की परेशानी होती है तो फिर आप इस तरह की ब्रेन टू व्हीकल कार से सफर तय कर सकते हैं। यह बेहद आसान होगा। इसके अलावा बिज़नेस के बिज़ी शेड्युल में जब आप सफर कर रहे हों तब इस तरह की तकनीक कार में होने पर आप काफी रिलेक्स फील कर सकते हैं। अगर आप सोचते हैं कि ब्रेन से कार तक इन संकेतों को पहुंचने में तो काफी समय लगेगा तब तो सारी तकनीक ही असफल हो सकती है। पर निर्माता कंपनी का कहना है कि कार में मौजूद ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्‍टमए ड्राइवर के दिमाग से निकलने वाले वेव सिगनल्स को बहुत तेजी से प्रोसेस करके रोड पर बिल्‍कुल सही निर्णय लेने की क्षमता रखता है।