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BREAKING NEWS : 2019 का चुनाव नहीं लड़ेगीं उमा भारती, राजनीति को कहेंगी अलविदा?

Patrika 2018-02-13 06:04:45

अगले दो तीन साल वे राज्यसभा या लोकसभा नहीं जाना चाहतीं। हालांकि वे पार्टी के चुनाव प्रचार जरूर करेंगी।

भोपाल। उमा भारती ने खुलकर इस बात का ऐलान कर दिया है कि वे अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगीं। यानि कि बतौर सांसद ये उमा भारती का आखिरी कार्यकाल है। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उमा भारती ने अगला चुनाव नहीं लड़ने की बात कही। भोपाल मे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए उमा ने कहा कि वे लम्बे समय से कमर और घुटने के दर्द से परेशान हैं, इलाज चल रहा है, लिहाजा अगले दो तीन साल वे राज्यसभा या लोकसभा नहीं जाना चाहतीं। हालांकि इस बीच उन्होंने ये भी साफ कर दिया है कि वे पार्टी के लिए चुनाव प्रचार जरूर करेंगी। आपको बता दें कि हाल ही में उमा भारती ने उत्तर प्रदेश में इस बात का ऐलान किया था कि अब चुनाव नहीं लडेंगी।


इतने भी बुरे दिन नहीं आए कि चुनाव प्रचार न कर सकूं
माना जा रहा था कि उमा भारती अपने राजनीति से सन्यास के ऐलान के बाद पार्टी से दूरी बना लेंगी। लेकिन ऐसी तमाम आशंकाओं को उन्होंने साफ कर दिया। उमा भारती ने एक सवाल के जवाब में अपने चिर-परिचित फायरब्रांड अंदाज में जवाब दिया कि इतने बुरे दिन भी नहीं आ गए हैं कि चुनाव प्रचार नहीं कर सकूं। हालांकि ये बात उन्होंने अपने स्वास्थ्य को लेकर कही थी, लेकिन इस जवाब से ये बात भी जरूर साफ हो गई है कि उमा भारती भले ही चुनाव नहीं लड़ें, लेकिन चुनावी मैदान में उनका अंदाज जरूर नजर आएगा।

 

तीन मौकों पर हुई सबसे ज्यादा खुशी
उमा भारती ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने तीन मौकों पर सबसे ज्यादा खुशी हुई। उमा भारती के अनुसार, उन्हें सबसे ज्यादा खुशी तब हुई, जब उन्होंने सन्यास लिया। इसके बाद बीजेपी को पूर्ण बहुमत मिलने पर और फिर योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए जाने पर सबसे ज्यादा खुशी हुई। उमा ने ये भी बताया कि मां और भाई की मृत्यु के अलावा उन्हें सबसे ज्यादा दुख उस समय हुआ था जब उनका नाम व्यापमं मामले से जुड़े था।


बीजेपी के साथ शुरू हुई थी राजनीतिक यात्रा
मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में जन्मीं, 58 वर्षीय उमा भारती वर्तमान में भारत की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री हैं। उमा वे मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी है। उन्हें ग्वालियर की महारानी विजयराजे सिंधिया ने राजनीति में उभारा था। साध्वी ऋतंरा के साथ उन्होंने राम जन्मभूमि आन्दोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। इस दौरान उनका नारा श्री रामलला घर आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे, हर जगह गूंजता नजर आया। वास्तविकता में उमा भारती को साध्वी से राजनेता बनाने वाला यही आंदोलन था। ये अलग बात है कि उमा 1984 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ी और हार गईं।

 

इसके बाद 1989 लोकसभा चुनव में वह खजुराहो संसदीय क्षेत्र से सांसद चुनी गईं। 1991, 1996, 1998 में इसी सीट से उन्हें सांसद चुना गया। बाद में 1999 में वह भोपाल सीट से सांसद चुनी गईं। वाजपेयी सरकार में वह मानव संसाधन विकास, पर्यटन, युवा मामले एवं खेल और अंत में कोयला और खदान जैसे विभिन्न राज्य स्तरीय और कैबिनेट स्तर के विभागों में कार्य किया। 2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में उनके नेतृत्व में भाजपा ने तीन-चौथाई बहुमत प्राप्त किया और मुख्यमंत्री बनीं। अगस्त 2004 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जब उनके खिलाफ 1994 के हुबली दंगों के संबंध में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ।

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