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‘मोदी केयर’ से बाहर रहेगा पश्चिम बंगाल, ममता ने किया ऐलान

Newstrack Hindi 2018-02-14 12:49:13

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन से पश्चिम बंगाल के बाहर रहने का ऐलान किया है। बनर्जी के इस ऐलान से पश्चिम बंगाल इस महत्वाकांक्षी योजना से बाहर रहने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मालूम हो कि इस बार के केंद्रीय बजट में देश के 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा देने की घोषणा की गयी थी। इसे ‘मोदी केयर’ की संज्ञा दी जा रही है।


राज्य के संसाधनों को बर्बाद नहीं करेंगे 

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य सरकार अपनी गाढ़ी मेहनत से जुटाए गए संसाधनों को इस कार्यक्रम में लगाकर बर्बाद नहीं करेगी। राज्य के कृष्णानगर में आयोजित एक जनसभा में ममता ने कहा कि केन्द्र सरकार की इस स्वास्थ्य बीमा योजना में 40 फीसदी रकम राज्यों को देनी होगी। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य के पास पहले से ये स्कीम है तो राज्य दूसरी स्कीम में पैसा क्यों दे?


विपरीत हालात में गरीबों की सेवा का दावा 

मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की नीतियों की चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने अस्पतालों में मरीजों की भर्ती और इलाज को पहले से ही मुफ्त कर रखा है। उन्होंने दावा कि बंगाल सरकार ने अपने स्वास्थ्य साथी कार्यक्रम का लाभ अब तक 50 लाख लोगों तक पहुंचाया है। राज्य में गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने के बारे में उन्होंने कहा कि हमने विपरीत हालात में ऐसा कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हमसे हर साल 48,000 करोड़ रुपये कर्ज देनदारी के रूप में ले लेती है। यह मुसीबत हमें सीपीएम सरकार से विरासत के रूप में मिली है। इसके बावजूद स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य के गरीबों की पूरी मदद कर रहे हैं।


मोदी सरकार पर फंड रोकने का आरोप 

ममता ने जनसभा मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केन्द्र सरकार राज्य की विभिन्न योजनाओं के लिए पैसा रोक रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मोदी सरकार ने अपनी जन विरोधी नीतियां नहीं बदलीं तो वह उसके खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एकीकृत बाल विकास सेवाओं सहित किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों से संबंधित अन्य विकास कार्यक्रमों के लिए अपना 90 प्रतिशत कोष रोक दिया है। इसके बावजूद हमने एक भी परियोजना को नहीं रोका है और वित्तीय बाधाओं के बावजूद अपने खुद के संसाधनों से पर्याप्त कोष देकर राज्य सरकार विभिन्न परियोजनाएं चला रही है।