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भारत में बना विश्व का पहला अनूठा पर्यटन स्थल, तस्वीरें देख हो जाएंगे हैरान

Patrika 2018-02-14 01:30:22

भोलेनाथ की यह अनूठी प्रतिमा बिजली गिरने से नहीं होगी क्षतिग्रस्त, न पानी में डूबने के बाद उतरेगा रंग

सिवनीमालवा। जिले के सिवनी मालवा के आवली घाट में नया पर्यटन क्षेत्र विकसित किया गया है। जो अपने आप में भारत देश का अनूठा पर्यटन स्थल है। दरअसल नर्मदा के तट पर बंजर पड़ी पड़ी भूमि पर भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इसमें विशेष रसायनों का उपयोग किया गया है ताकि बाढ़ आने पर नर्मदा में डूबने पर भी मूर्ति का न तो रंग उतरेगा और न ही कोई नुकसान होगा। इतना ही नहीं आकाशीय बिजली से बचाने के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। तीन साल से मूर्ति बन रही है, जो अब अंतिम चरण में है।

 

5 करोड की लागत से हुए निर्माण कार्य
प्रसिद्ध नर्मदा तट आंवली घाट और संत दादा धूनीवाले की तपोस्थली के आसपास के क्षेत्र का कायाकल्प का यह कार्य 2 वर्षो से क्षेत्रीय विधायक सिंह की मंशानुरुप कराया जा रहा था। जिसमें नर्मदा के किनारे 85 हजार वर्गफिट में पक्का रंगीन घाट निर्माण, डेढ़ एकड़ क्षेत्र में मनोहारी बगीचे का निर्माण और उसी में विशालाकाय 71 फिट की औघड़दानी भगवान शिवजी की प्रतिमा और सामने नन्दी की विशाल प्रतिमा का निर्माण किया गया है वही तीज त्यौहारों पर आने वाले श्रृद्धालुओं, नर्मदा परिक्रमावासियों, पर्यटकों के विश्राम करने के लिए 2 करोड़ की लागत से सर्व सुविधायुक्त आकर्षक विश्राम गृह बनाया गया हैं, जिसमें 8 कमरे, 2 मिटिंग हाल, विशाल भोजन कक्ष और रसोई कक्ष का निर्माण भी किया गया हैं।

 

हरिद्धार की हर की पौड़ी की तरह करें स्नान
क्षेत्र के सभी नर्मदा तटों में आंवली घाट में प्रकृति ने भी अदभुत रंग और दृश्य संजोए हैं। यहा नर्मदा के प्रवल प्रवाह में बड़ी़-बडी चट्टानों ने भी डेरा डाल रखा हैं। जिनमें बडी-बड़ी खोह भी हैं और सैकड़ों फिट गहरा निर्मल जल भी, जिसका कोई थाह ही नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा
आयपा में यदुवंशी समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में 21 अप्रेल 2016 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान आए थे। इस दौरान उन्होने आंवली घाट में विकास कार्य के लिए राशी देने की घोषणा की थी। जिसका क्षेत्र के नागरिको को इंतजार हैं।

नर्मदा तट पर इकलौती भगवान शंकर की यह भव्य मूर्ति होगी। बाबई के रहने वाले राजेश कहते हैं, वह और उनका भाई इस काम में लगे हैं। वे पहले प्लास्टर ऑफ पेरिस, सीमेंट और मिट्टी की मूर्तियां बनाया करते थे। इसमें लोहा, सीमेंट के साथ विशेष रसायनों का प्रयोग किया गया है। उनकी तकनीकी मदद पीडब्ल्यूडी रितेश जैन कर रहे हैं। मूर्ति पर भूकंप और मौसम बाढ़ आदि का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

 

बनेंगे 12 ज्योतिर्लिंग
यहां पर विशाल मूर्ति के साथ ही 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन भी कराए जाएंगे। यहां ज्योतिलिंग की तरह ही निर्माण कराया जाएगा।

 

ऐसे बनी मूर्ति
मूर्ति का बेस 45 वाय 45 फीट के क्षेत्र में बना है। करीब 20 टन लोहा और सीमेंट का उपयोग किया गया। दो विशेष रसायन हार्डनेर सिलिकॉन और अल्टिमा प्रोटेक का उपयोग किया गया।

आधी डूब गई थी मूर्ति
मूर्ति निर्माण के दौरान तीन साल में दो बार बाढ़ आई, जिसमें आधी मूर्ति पानी में डूब गई थी। लेकिन उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

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