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मजदूर महिलाएं पहुंचीं बीडीपीओ कार्यालय

Dainik Tribune 2018-05-16 22:26:55

इन्द्री स्थित बीडीपीओ कार्यालय में बुधवार को बुटानखेड़ी गांव की मजदूर महिलाएं मनरेगा अधिकारी से काम की मांग करती तथा अपना मांगपत्र दिखाती हुईं। -निस

इन्द्री, 16 मई (निस)
रोजगार आज की सबसे बड़ी समस्या है। गांव में मजदूरों को साल में कम से कम सौ दिन काम देने के लिए महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) बनाई गई थी, लेकिन योजना को लागू करने में अनेक प्रकार की खामियां सामने आती रहती हैं, जिससे योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पाता है। उपमंडल के गांव बुटानखेड़ी की मजदूर महिलाओं ने स्थानीय बीडीपीओ कार्यालय पहुंच कर अपना मनरेगा के तहत पिछले तीन साल से काम नहीं मिलने का दर्द बयां किया और रोष जताया। महिलाओं ने कहा कि उन्हें काम चाहिए, इसके लिए वे कई बार गुहार लगा चुकी हैं, लेकिन उन्हें काम देने में कार्यालय नाकाम रहता है। महिलाओं ने सम्मानजनक जीवन के लिए मनरेगा के तहत काम की मांग की।
ग्रामीण सुनीता, संजू, ओमा, तूशी, अंकीता, आशा ने कहा कि वे गरीब परिवार से हैं। परिवार के पास अपना कोई काम धंधा नहीं है। महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने, बीमारी का इलाज करवाने, घर का खर्च चलाने के लिए महिलाओं का भी काम करना जरूरी है। महिलाओं ने कहा कि खेतों में मशीनों ने मजदूरों से काम छीन लिया है। इस सीजन में किसानों ने गेहूं की कटाई का अधिकतर काम मशीनों से करवाया। ऐसे में गांव के गरीब परिवारों के लिए काम का संकट खड़ा हो गया है। महिलाओं ने कहा कि सरकार को सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा, सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं और रोजगार की गारंटी देनी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। ऐसे में उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 100दिन का काम दिया जाए। उन्होंने कहा कि वे पिछले तीन सालों से काम के लिए भटक रही हैं। लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
क्या कहते हैं मनरेगा अधिकारी
मनरेगा अधिकारी विपिन कुमार ने कहा कि गांव बुटानखेड़ी में मिट्टी बेहद खराब है। वहां कस्सी नहीं चलती है, जिस कारण से वहां काम नहीं करवाया जा सकता। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि उन्हें जल्द ही गांव के ही आस-पास काम दे दिया जाएगा।