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दीवाली के पहले अमित शाह को लिखा गया गोपनीय पत्र हुआ लीक, BJP में मचा हड़कम्प

Patrika 2018-11-06 13:43:54

रणविजय सिंह

आजमगढ़. भाजपा के भीतर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। अतरौलिया विधानसभा प्रत्याशी के बाद अब पिछड़ी जाति के नेता और गोपालपुर विधानसभा के प्रत्याशी रहे श्रीकृष्ण पाल का राष्ट्रीय अध्यक्ष को लिखा गया पत्र लीक हो गया है। जिसमें उन्होंने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में हार के लिए पार्टी के कुछ सवर्ण नेताओं के भीतरघात को जिम्मेदार ठहराया है। यह पत्र लीक होने के बाद भाजपाई सहमे हुए हैं। वजह, पिछले दिनों कन्हैंया निषाद ने पत्र लिखकर सीधे जिलाध्यक्ष पर आरोप लगाया था। अब नये खुलासे के बाद चर्चा तेज हो गयी है कि इस तरह की गुटबंदी के बाद बीजेपी के मिशन-2019 का क्या होगा।

 

श्रीकृष्ण पाल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें गोपालपुर से प्रत्याशी बनाया गया था। मीडिया से लेकर आम आदमी तक 2017 के विधानसभा चुनाव में उनके जीत का आकलन कर रही थी लेकिन पार्टी के लोगों के ही भीतरघात करने के कारण न केवल वे चुनाव हार गये बल्कि सीट पार्टी के हाथ से चली गयी।

 

श्रीकृष्ण का आरोप है कि चुनाव में टिकट मांगने वाले अनिरूद्ध सिंह, राधेश्याम सिंह गुड्डू, तेज प्रताप सिंह ने पार्टी को हराने के लिए लगातार काम किया। इन्होंने पार्टी के कार्यक्रम से लेकर रणनीति तक को विपक्षियों को बताया। उक्त लोगों ने ऐसे लोगों की सूची विपक्षियों को दी जो पैसा लेकर टूट सकते थे। इतना ही नहीं उक्त लोगों ने विरोधी दलों से मिलकर पैसा भी बटवाया और स्वंय भी पैसा लेकर पार्टी और मेरे विरूद्ध अभियान चलाया।

 

यहीं नहीं पूरी साजिश के तहत उक्त लोगों ने काम किया। उक्त लोगों द्वारा चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं को भी भ्रमित किया गया। चुनाव हारने के बाद उक्त लोगों ने पार्टी के खिलाफ जश्न भी मनाया। उक्त लोगों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए।

 

बता दें कि इसके पूर्व अतरौलिया विधानसभा प्रत्याशी कन्हैंया लाल निषाद का पत्र लीक हुआ था। जिसमें उन्होंने वर्तमान जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह, विनोद राजभर, प्रमोद सिंह, जयप्रकाश पांडये आदि पर पार्टी से भीतरघात करने तथा बसपा प्रत्याशी का समर्थन कर बीजेपी को हराने का आरोप लगाया था। इससे साफ होता है कि बीजेपी के भीतर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी गुटबाजी का शिकार है। जो हालात बीजेपी में है उसका सीधा असर पार्टी के मिशन 2019 पर पड़ सकता है। पार्टी के लोग मामले को दबाने की कोशिश कर रहे है। वहीं विपक्ष इसे अपने लिए बेहतर मान रहा है।