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भाई दूज: भाई के लम्बी उम्र के लिए बहनें शुभ मुहूर्त में लगाएं टीका

Patrika 2018-11-08 12:18:06

वाराणसी. भैया दूज दिवाली के अगले दिन या दूसरे दिन मनाया जाता है। भइया दूज या यम द्वितीया कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है। भाईदूज के दिन बहनें भाई को टीका लगाती हैं, तो आपको बता दें कि इस साल भाई दूज 9 नवंबर को मनाया जाएगा। भाई दूज या भैया दूज दिवाली के 2 दिन बाद आता है।

 

भाई-बहन के परस्पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक त्योहार पूरे देश में मनाए जाने वाले इस त्योहार के दिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनके उज्ज्वल भविष्य और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई दूज या भैया दूज का यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह त्‍योहार 21 अक्‍टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए कामना करेंगी। भाई दूज को भाऊ बीज और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

 

भाई दूज भी रक्षाबंधन की तरह है भाई-बहन के रिश्ते को मनाने का त्योहार है। भाईदूज दोपहर के बाद मनाया जाता है। इस दिन दोपहर के बाद बहनें भाई को तिलक करती हैं। कुछ बहनें इस दिन दोपहर तक व्रत भी रखती हैं। इस दिन दोपहर के बाद यम पूजन करने का भी प्रावधान है।

 

भाई दूज या भैया दूज के शुभ मुहूर्त:
शुभ मुहूर्त शुरू- दोपहर 1:10 मिनट
शुभ मुहूर्त समाप्त- दोपहर 3:27 मिनट
शुभ मुहूर्त की अवधि- 2 घंटे 17 मिनट

 

पूजा विधि
भाईदूज, भाई दूज या भैया दूज की पूजा बहनों द्वारा की जाती है। इस दिन सबसे पहले नहाथोकर तैयार हो जाएं. फिर आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आप व्रत करती हैं तो सूर्य को जल देकर व्रत शुरू करें. शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं। फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल वगैरह रखें। अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं। शाम के समय यमराज के नाम का दीया जरूर जलाएं।

भाई दूज या भैया दूज पर तिलक करते समय पढ़े ये मंत्र
गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को।
सुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।