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Govardhan Puja 2018 Vrat Katha, Vidhi: यहां पढ़ें गोवर्धन पूजा की व्रत कथा

Jansatta 2018-11-08 12:08:52
Govardhan Puja Vidhi, Muhurat, Timings, Mantra: धार्मिक कथा अनुसार के द्वापर युग में सभी लोग अच्छी जलवायु और उपरोक्त समय पर बारिश होने के लिए इंद्र देव की पूजा करते थे।

गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं। भारतीय लोकजीवन में इस पर्व का अधिक महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा संबंध दिखाई देता है। शास्त्रों के अनुसार गाय उसी प्रकार पवित्र होती है जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरुप भी कहा गया है। इसलिए गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए भी कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है। इस साल 8 नवंबर को गोवर्धन पूजा का त्योहार है।

 धार्मिक कथा अनुसार के द्वापर युग में सभी लोग अच्छी जलवायु और उपरोक्त समय पर बारिश होने के लिए इंद्र देव की पूजा करते थे। एक बार बाल श्री कृष्ण जी ने इस पूजा के बारे में नन्द जी से पूछा तो उन्होंने बताया कि यह पूजा इंद्र देव के अभिवादन के लिए की जाती है। तब कृष्ण जी ने गांववासी को बताया कि हमारी जलवायु के लिए इंद्र देव की नहीं अपितु गोवर्धन पर्वत का अभिवादन करना चाहिए।


सभी को बाल श्री कृष्ण जी की बातें अच्छी लगी। तभी से सभी ने इंद्र देव की बदले में गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। इस बात से इंद्र देव अति क्रोधित हो गए। क्रोधित इंद्र देव ने गोकुल में आंधी-तूफ़ान और वर्ष से त्राहि मचा दी। जिससे सभी का जीवन खतरे में था। विपरीत स्थिति में बाल श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपने हाथों की छोटी सी उंगली पर उठा लिया। जिससे सभी लोगों को संरक्षण प्रदान किया।

सात दिनों तक सतत वर्षा हुई और श्री कृष्ण जी ने सातों दिन तक अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाये रखा। इसके बाद इंद्र देव को अपनी गलती का अहसास हुआ कि जिस जलवायु को वो खुद के द्वारा रचित समझते हैं। वो कर्म बंधन से बंधा है और यह उनका कर्तव्य है। इसका अभिमान करना अनुचित है। उस दिन से ही गोवर्धन पूजा का प्रारम्भ हुआ।