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नोटबंदी के ठीक बाद इन 5 समस्याओं से घबरा गई थी मोदी सरकार!

Kakkajee 2018-11-08 22:30:00

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा के बाद सरकार को उम्मीद थी कि स्थिति दो हफ्ते में धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी. लेकिन इसका उल्टा हो रहा था. लोगों की समस्याएं बढ़ती जा रही थीं. नोटबंदी के 30 दिन बाद भी एटीएम और बैंकों में लंबी कतारें खत्म नहीं हो रही थीं. कैश की किल्लत से लोगों के चेहरे पर गुस्सा नजर आने लगा था. इस दौरान कुछ ऐसी खबरें आने लगीं, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई थी. हालात से निपटने के लिए हर रोज नोटबंदी के नियम में बदलाव हो रहे थे. हम ऐेसे से ही 5 मुद्दे लेकर आए हैं, जिसको लेकर उस समय सरकार घबरा गई थी. 
बैंक के कर्मचारी भ्रष्टाचार के घेरे में 
नोटबंदी के बाद तमाम बैंकों में उनके कर्मचारियों द्वारा ही कालाधन को सफेद किए जाने की खबरें आईं. ये कर्मचारी कमीशन के एवज में ब्लैक मनी को सफेद करने में जुटे थे. ऐसे मामलों को लेकर कई जगह छापेमारी हुई और कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं. यानी नोटबंदी के बाद इस तरह के भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला था. 
प्रवासी मजदूरों का पलायन
रोजी-रोटी के लिए महानगरों का रुख करने वाले मजदूरों पर नोटबंदी की मार पड़ी थी. एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर से करीब 40 फीसदी प्रवासी मजदूरों का अपने घर लौटना पड़ा था. इनकी दिहाड़ी कैश आधारित थी, लेकिन कैश की किल्लत के चलते इनकी कमाई पर असर पड़ा. 
कतार में मौतें
एटीएम और बैंकों के बाहर कतारों में लगे लोगों में कुछ की मौतें भी हुई थीं. कहा जा रहा था कि देशभर में तकरीबन 80 से ज्यादा लोग एटीएम और बैंकों के बाहर लगी लंबी कतारों में अपनी जान गवां बैठे. 
जन-धन खातों में ब्लैक मनी!
नोटबंदी की आड़ में करोड़ों रुपये का कालाधन बदलने का मामला सामने आया था. लोगों ने कालाधन खपाने के लिए कई तरीके निकाले. कई लोगों ने दूसरे के जन-धन खातों में अपनी ब्लैक मनी जमा कर दी. एक अनुमान के मुताबिक नौ नवंबर तक इन खातों में 45 हजार 627 करोड़ रुपये की जमाराशि‍ थी. यह राशि‍ 30 नवंबर को 74 हजार 322 करोड़ रुपये हो गई थी. 
बाजार में सुस्ती
नोटबंदी के एक महीने बाद तक शेयर बाजार सुस्त हो गया था. नोटबंदी के ऐलान से 7 दिसंबर तक शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. बीएसई 8 नवंबर को जहां 27,591 था वहीं 7 दिसंबर को 26,237 तक पहुंच गया. नोटबंदी से खरीदार सोने से दूर रहे वहीं रियल एस्टेट, सेवा और कृषि क्षेत्र पर असर पड़ा था.