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पीजी कॉलेज में सुविधा नहीं, वाईफाई के लिए सिस्टम लगाए लेकिन अभी तक शुरू नहीं

Patrika 2018-11-09 16:03:19

कवर्धा. छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले का एकमात्र पीजी कॉलेज की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। कई हड़ताल व आंदोलन करने के बाद भी यहां पढ़ाई करने वाले छात्रों को सुविधा होने के बाद भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।पीजी कॉलेज में सुविधांए तो कई हैं, लेकिन यहां के प्रबंधन की लापरवाही के कारण सुविधाओं का लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। पीजी कॉलेज को हाईटेक बनाने के लिए यहां वाईफाई लगाया गया, लेकिन यह बंद पड़ा है।

यहां के विद्यार्थियों के पास मोबाइल होने के बाद भी वाईफाई की सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। वहीं महाविद्यालय प्रबंधन भी वाईफाई को सुधारने की दिशा में कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि विद्यार्थियों के लिए प्रारंभ की गई इस सुविधा पर काफी राशि खर्च की जा चुकी है।

जनभागीदारी की पहल नहीं
मुख्य बात तो यह भी है कि जनभागीदारी के अध्यक्ष व अन्य सदस्य भी विद्यार्थियों को लाभ दिलाने कोई पहल नहीं करते। केवल मीटिंग में बैठकर समय व्यतीत करते हैं। विद्यार्थी चाहते है कि कॉलेज में मौजूद सुविधा का उन्हें भरपूर लाभ मिले, जबकि जिम्मेदार लोग उनकी परवाह ही नहीं करते। इसके कारण विद्यार्थियों को लाभ नहीं मिल रहा।

टेबल कुर्सी टूटे

पीजी कॉलेज में कई वर्ष पहले टेबल कुर्सी खरीदा गया था, जो अब बड़ी संख्या में टूट चूके हैं। इससे विद्यार्थियों को बैठकर पढ़ाई करने में परेशानी होती है। नए भवन में तो विद्यार्थियों के बैठने कुर्सी टेबल ही नहीं है। इसके कारण नए कमरों में क्लास नहीं लग रही है।

पिछले वर्ष से कैंटिन बंद पड़ा
पीजी कॉलेज में लाखों रुपए खर्च कर कैंटीन बनाया गया है, लेकिन इसका लाभ भी विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। कॉलेज प्रबंधन द्वारा कैंटिन खोलने की पहल तो की प्रारंभिक राशि अधिक होने के कारण किसी ने रूचि नहीं ली। राशि कम करके कैंटिन को खोला जा सकता है। भले कॉलेज प्रबंधन को कम राशि मिले, लेकिन कुछ न मिलने से बेहतर ही है। इस कैटिंग पर कॉलेज प्रशासन ने लाख रुपए खर्च कर चुकी है, लेकिन इसका लाभ विद्यार्थियों को नहंी मिल पा रहा है। कुछ दिन कैटिंग खुला था लेकिन अब वह बंद हो गई।

मिल रही सुविधा
कवर्धा पीजी कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य एसएस महापात्रे ने बताया कि कॉलेज में वाईफाई व अन्य सुविधा है, लेकिन कुछ कारण से वाइ-फाई नहीं चल रहा है। कैंटिंग के लिए टेंडर निकाला गया था, किसी ने कैंटिन चलाने रुचि नहीं दिखाई। बाकि अन्य सुविधाएं विद्यार्थियों को मिल रहा है।