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नोटबंदी ने तो अर्थव्यवस्था का बाजा बजा दिया

Janadesh 2018-11-09 16:48:26

गिरीश मालवीय 

नई दिल्ली .नोटबन्दी की दूसरी सालगिरह पर सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी के नए आंकड़े आए है जो बता रहे है कि इस अक्टूबर में देश में बेरोजगारी की दर 6.9 फीसदी पर पहुंच गई है जो पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा है. सीएमआईई के मुताबिक देश में बेरोजगारी को लेकर हालात बदतर हैं. श्रमिक भागीदारी भी घटकर 42.4 फीसदी पर पहुंच गया है जो जनवरी 2016 के आंकड़ों से भी नीचे है.

 

पिछले दिनों जब भारतीय रेल ने 90,000 नौकरियों की घोषणा की, तो करीब ढाई करोड़ युवाओं ने आवेदन किया, उत्तर प्रदेश में 62 पुलिस मैसेंजर पदों के लिए 93,000 से अधिक उम्मीदवार थे, जबकि राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के मात्र पांच पदों के लिए 23,000 से ज्यादा उम्मीदवार थे. सितंबर 2015 में, चपरासी के 368 पदों के लिए 23 लाख से अधिक आवेदन आए थे, जिनमें से 250 से अधिक डॉक्टरेट और करीब 25,000 स्नातकोत्तर थे. छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सांख्यिकी निदेशालय को अगस्त, 2015 में चपरासी के 30 पदों के लिए 75,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जबकि अप्रैल, 2018 में जादवपुर विश्वविद्यालय को चपरासी के 70 पदों के लिए 11,000 से अधिक आवेदन मिले.

 

यहाँ तक कि एजुकेशन लोन में भी एनपीए बढ़ा है. 2016-17 में एजुकेशन लोन का 7.67 प्रतिशत लोन डूब गया था. इससे दो साल पहले यह 5.7 फीसदी था. महंगे कर्ज लेकर पढ़ाई की फिर नौकरी नहीं मिली. तो कर्ज चुकाने की क्षमता नहीं है.मोदी  कहते है कि पंजीकृत उद्योगों की संख्या बीते समय में 66 लाख थी और 48 लाख नये उद्योग पंजीकृत हुए हैं यानी नये उद्योग बढ़ रहे हैं तो रोजगार कहा है, 2 करोड़ रोजगार की बात तो आप छोड़ ही दीजिए. अब तो शर्म कीजिए मोदीजी!, दो साल बाद अब तो बोल दीजिए कि नोटबन्दी हमारी सबसे बड़ी गलती थी कि अभी और जलील होना बाकी है? नोटबन्दी के जितने भी लाभ आपने गिनाए थे क्या एक भी पूरा हुआ है?

 

आपके झूठे ओर भरमाने वाले आंकड़ो की पोल पूरी तरह से खुल चुकी है आपकी सारी बाते झूठी निकली तो आप आखिर में बोले थे कि ओर कुछ हुआ न हो लेकिन नोटबंदी से देश में टैक्स देनेवालों की संख्या ओर टैक्स संग्रह भी बढ़ गया है. लेकिन इस दावे की पोल खुद वित्त मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने खोल दी है.सीबीडीटी ने करीब हफ्ते भर पहले जारी आंकड़ों में बताया है कि कुल कर-संग्रह में प्रत्यक्ष कर पिछले पांच सालों में सबसे कम वित्त वर्ष 2016-17 में ही रहा है.मोदी जी क्या हुआ आपके कालाधन, कैशलेस इकोनॉमी, भ्रष्टाचार पर लगाम, नकली करेंसी पर लगाम, रियल एस्टेट सेक्टर में कीमतों में कमी, आतंकवाद का खात्मा, सेविंग में इजाफा, बैंकों की कमाई, सस्ता कर्ज जैसे मुद्दों का ?

 

आप तो बोलेंगे नही, न ही आपका यह गोदी मीडिया बोलेगा आपकी नोटबन्दी से आम आदमी की सेविंग घट गयी, जीडीपी लुढ़क गयी. बैंको की हालत तो इस कदर खराब हुई कि आप रिजर्व बैंक के पीछे पड़े है कि अपने कॉन्टिजेंट फंड में से साढ़े तीन लाख करोड़ दे दे. रियल इस्टेट सेक्टर तो ऐसा बर्बाद हुआ कि उबर ही नही पाया तब भी दाम नही घटे.नोटबंदी की वजह से छोटे और मझौले उद्योग धंधे ठप पड़ गए, उसमे रोजगार पा रहे लोग दर दर को ठोकरे खाने को मजबूर हो गए, कई ज़िंदगियां तबाह हो गईं. दो साल बाद अब पता चल रहा है कि इस फ़ैसले से क़रीब सिर्फ और सिर्फ गरीब लोग ही बुरी तरह प्रभावित हुए. काला धन रखने वाले अमीर न तो उस वक्त लाइन में लगे और न ही दो साल में उन पर कोई कार्यवाही हुई.

 

नोटबन्दी का समर्थन करने वाले आपके सारे स्वयंभू अर्थशास्त्री तो पता नही कौन से दड़बे में जाकर छुपे है मीडिया को तो याद तक नही आ रहा कि आज नोटबन्दी की दूसरी बरसी है. कोई नाम तक लेने को तैयार नही है और न ही आपकी पार्टी का कोई नेता इस बारे में अब बात तक करता है. लेकिन हम तो पूछेंगे, ओर आज आप जवाब नही देंगे 2019 में आपको इस बात का जवाब जरूर देना होगा.