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जीते जी कद्र क्यों नहीं होती?

MomEspresso Hindi 2019-01-09 17:23:33

जब तक अजय ज़िंदा था तब तक हमेशा उसके हिस्से ताने ही आए।अजय:-एक ऐसा बेटा, जिसने हमेशा अपने माता- पिता को भगवान का दर्जा दिया पर कभी उनका प्यारा न हुआ क्योंकि उनकी नज़रों में तो छोटा बसा हुआ था।अजय:-एक ऐसा भाई,जिसने अपने छोटे भाई को बेटे की तरह संभाला था पर उसका भाई कभी भी उसे न समझ सका। अजय:-जो हर रिश्तेदार के दुख में सबसे पहले पहुँचता था पर जब वो डिप्रैशन में चला गया तब उसके दुख में खड़ा होने वाला कोई नहीं था।

आज अजय की अर्थी उठ रही है।उसके माँ -बाप,भाई और नाते रिश्तेदार सब फूट फूटकर रो रहे हैं।सब उसकी अच्छाई को याद कर रहे हैं।सबका यही कहना है कि,"भगवान ऐसा बेटा- ऐसा भाई सबको दे,इनके घर का तो वो हीरा था हीरा।" सोचने वाली बात ये है कि,"जब तक वो ज़िंदा था तब क्या इन सबकी सोच यही थी तब तो उसको कोसा जाता था,गलत समझा जाता था,उसके माँ बाप तक उसके साथ भेदभाव करते थे।उसके हिस्से सिर्फ ज़िम्मेदारियाँ आईं और उसने बखूबी  निभाईं भी।आज जब वो चला गया तो अचानक सबके दिल में उसके लिए प्यार उमड़ रहा है,आँसू निकल रहे हैं।"

ये कैसी विडम्बना है?जीते जी तो सब गिराने में लगे हैं, वहीं जब निष्प्राण हों गये तो सब उठाने में लगे हैं।क्या खूब कहा है एक मुर्दे ने -"ये जो मेरी मौत पर फूट फूटकर रो रहे हैं गर अभी उठ जाऊँ तो जीने नहीं देंगे।"

ऐसा क्यों है कि जब तक ज़िंदा हैं 

कोई कदर नहीं कोई फिकर नहीं 

कल तक जिनकी नजरों में कंकड़ की माफिक चुभते थे 

मरते ही आज अचानक हीरे के कैसे हो गए?

 कब तक चलेगा ये सितम?

कब तक बने रहेंगे बेरहम?

ज़िंदा इंसान को जीते जी मारते हैं 

मरे हुए पर रो रोकर दहाड़ते हैं 

अब भी वक्त है,अपनी इंसानियत जगा लो 

जीते जी सारे गिले शिकवे भुला लो 

रिश्ते नातों से ऊपर उठकर,सिर्फ एक बार 

इंसान का इंसान से रिश्ता निभा लो।

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आपकी सखी- शुभ किरन

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