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MP: जल संसाधन विभाग में 1626 करोड़ का घपला, सीएजी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Eenadu India 2019-01-10 22:06:00

कैग रिपोर्ट.


भोपाल। मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग में जल कर के निर्धारण और वसूली में 1600 करोड़ से ज्यादा की अनियमितता होने का मामला सामने आया है. यह चौंकाने वाला खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में हुआ है. सीएजी ने यह अनियमितता 18 संभागों की पिछले छह सालों के दस्तावेजों की जांच में पकड़ी है.


वहीं जल संसाधन विभाग ने भी स्वीकार किया है कि 1 हजार 626 करोड़ रूपये से ज्यादा की अनियमितता हुई है. विधानसभा के पटल पर रखी गई सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक जल संसाधन विभाग के पूरे प्रदेश में 86 संभाग हैं, जिसमें से सीएजी ने 2012 से 2017 की अवधि के दौरान 18 संभागों के अभिलेखों की जांच की है.

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सीएजी की पांच महिने चली जांच में पाया गय है कि अनूपपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, दतिया, देवलोंद, इंदौर, इटारसी, जबलपुर, कटनी, नसरूल्लागंज, सीहोर, सिवनी मालवा, शिवपुरी, सोहागपुर, सिंगरौली, उमरिया और उज्जैन जिल ने जल आपूर्ति तो की, लेकिन उसकी वसूली में जमकर गड़बड़ी हुई है. कई कंपनियों पर अधिकारियों ने खूब मेहरबानी दिखाई.
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कैग की रिपोर्ट के मुताबिक मोजरबीयर पावर एंड इंफ्रस्ट्रक्चर लिमिटेड पर 17 करोड़ की वसूली सालों से बकाया है. इसी तरह एनटीपीसी पर 2 करोड़ और ओरियंटल पेपर मिल अमलई पर पिछले 20 साल के दौरान की 771 करोड़ की वसूली लंबित है. साथ ही स्थानीय निकायों पर सबसे ज्यादा बकाया है, इन निकायों में घरेलू जल आपूर्ति और किसानों से 1 हजार 489 करोड़ की वसूली की जानी थी.
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सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक नगर परिषद, मानपुर, सीहोर नगर पालिका, आष्टा नगर पालिका और दमोह नगर पालिका ने तो कंपनियों को जल आपूर्ति के लिए कोई अनुबंध ही नहीं किया है. इन पर साढ़े 11 करोड़ का जल कर बकाया है. सीएजी ने सरकार को सलाह दी है कि राजस्व अमले की कमी को पूरा किया जाए. साथ ही 8 हजार हेक्टेयर भूमि के लिए एक सिंचाई निरीक्षक नियुक्त किया जाए. उधर सरकार ने जीएजी को भरोसा दिलाया है कि वसूली के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाएगा.