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असम में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर दो दिवसीय हड़ताल, विरोध तेज

Haribhoomi 2019-12-09 13:22:55

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) आज लोकसभा में पेश किया गया है. बीजेपी ने अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। यह व्हिप सोमवार से बुधवार तक के लिए है। यह बिल गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोक सभा में पेश किया है।


इस बिल के खिलाफ असम के16 संगठनों ने 10 दिसंबर को 12 घंटे का असम बंद आहूत किया हुआ है। राज्य के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के हजारों छात्रों, विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ता मिलकर राज्य की राजधानी गुवाहाटी में नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोग बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। वहीं लोगों का कहना है कि इस बिल से भविष्य में असमिया समुदाय, असमिया भाषा, संस्कृति और विरासत को नुकसान पहुंच सकता है।

पूर्वोत्तर के राज्यों में काफी संख्या में लोग तथा संगठन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे असम समझौता 1985 के प्रावधान निरस्त हो जाएंगे जिसमें बिना धार्मिक भेदभाव के अवैध शरणार्थियों को वापस भेजे जाने की अंतिम तिथि 24 मार्च 1971 तय है।


क्या है नागरिकता संशोधन बिल

इस विधेयक में बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए छह अल्पसंख्यक समुदायों हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिखों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी।


मौजूदा कानून के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना अनिवार्य है. इस विधेयक में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह समयावधि 11 से घटाकर छह साल कर दी गई है। इसके लिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में कुछ संशोधन किए जाएंगे ताकि लोगों को नागरिकता देने के लिए उनकी क़ानूनी मदद की जा सके।