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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा ने कविता में बयां किया प्रवासी मजदूरों का दर्द

Sanjeevni Today 2020-05-22 19:59:00

कोरोना संकट काल में बुद्धजीवी वर्ग गीत और कविता के माध्यम से समाज को जागरूकता का संदेश दे रहा।


कोरोना संकट काल में बुद्धजीवी वर्ग गीत और कविता के माध्यम से समाज को जागरूकता का संदेश दे रहा। दो महीने से चल रहे लाकडाउन में सबसे दयनीय स्थिति प्रवासी मजदूरों की है। इन मजदूरों पर कैसे-कैसे और क्या-क्या दर्द टूटे इस आशय को बीस वर्षीय छात्रा अनुश्रुति सिंह ने अपनी कविता में पिरोया है। 

लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के हाल को कविता के माध्यम से बयां करते हुए अनुश्रुति ने लिखा कि 'मझधार में खड़ी तेरी नाव को लिखूं, या फिर अपनी ज़िंदगी के गुलज़ार को लिखूं, आखों से बहती तेरी आसुओं की नदी को लिखूं, या फिर तेरे सूखे गले को लिखूं, तेरे पैरों के छाले को लिखूं या फिर खाने को तेरे लाले को लिखूं, ऐ! मज़दूर तू ही बता मैं क्या लिखूं? 'तेरी रुकती हुई ज़िन्दगी को लिखूं या फिर अपनी ख़ुशनुमा ज़िन्दगी को लिखूं, बिन बुलाए तेरी मौत को लिखूं या फिर उनसे लड़ने की तेरी ताकत को लिखूं, दिन में तुझे मिले अंधेरे को लिखूं, या फिर कड़कती धूप में तुझे मिली छाँव को लिखूं, ऐ! मज़दूर तू ही बता मैं क्या लिखूं?' घर पहुंचने की तेरी होड़ को लिखूं या फिर अपनों से अपनी रार को लिखूं, ज़िन्दगी से मिली तेरी हार को लिखूं, या फिर तेरी जीतती हिम्मत को लिखूं, तुझे मिलती हुई सांत्वना को लिखूं, या फिर तेरी टूटी हुई आस को लिखूं, ऐ! मज़दूर तू ही बता मैं क्या लिखूं? 

टूटते हुए तेरे विश्वास को लिखूं या फिर तेरे लिए कुछ न कर पाने का अपने गुणगान को लिखूं, तेरी खामोशियों के शोर को लिखूं या फिर तेरी चीखों कर दिये अनसुने को लिखूं, तुझे मिलती सितम को लिखूं, या फिर तेरी जय-जयकार को लिखूं, ऐ! मज़दूर तू ही बता मैं क्या लिखूं? अंत में वो लिखती है कि तेरे काँटों भरी राह को लिखूं या फिर अपने ऐशो आराम को लिखूं, तेरे झुलसे हुए हाथ को लिखूं या फिर तेरे अनसुलझे सवाल को लिखूं, तेरे अनदेखे ख्वाब को लिखूं, या फिर तेरे जलते जज़्बात को लिखूं, ऐ! मज़दूर तू ही बता मैं क्या लिखूं? 

बतादें कि अनुश्रुति सिंह जिले के पीपरपुर थाना क्षेत्र के रामगंज की निवासी है। पिता विवेक विक्रम सिंह दीवानी न्यायालय में शासकीय अधिवक्ता हैं और जिले के वरिष्ठ पत्रकारों में शामिल हैं। अनुश्रुति प्रयागराज जिले की इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में स्नातक के दूसरे वर्ष की छात्रा है। पिछले दो सालों से वो निरंतर कविताएं लिख रही है। सोशल मीडिया की गूगल साइट से लेकर कई पत्रिकाओं आदि में उसकी कविताएं प्रकाशित भी हो चुकी है।