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रियल एस्टेट कंपनियों ने मौद्रिक नीति का स्वागत किया, आवास क्षेत्र के लिए और उपायों का आग्रह

Punjab Kesari 2021-04-07 21:50:19

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर को यथावत रखने और राष्ट्रीय आवास बैंक को 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने के निर्णय की सराहना की। हालांकि उद्योग ने यह भी कहा कि शीर्ष बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोष नकदी संकट से जूझ रही रियल एस्टेट कंपनियों के लिये उपलब्ध हो।

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) जमीन जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर को यथावत रखने और राष्ट्रीय आवास बैंक को 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने के निर्णय की सराहना की। हालांकि उद्योग ने यह भी कहा कि शीर्ष बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोष नकदी संकट से जूझ रही रियल एस्टेट कंपनियों के लिये उपलब्ध हो।

आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं किया और नरम रुख को बरकरार रखा।
रियल एस्टेट कंपनियों का शीर्ष संगठन क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष हर्षवर्धन पटोदिया ने कहा, ‘‘आरबीआई ने रेपा दर में कोई बदलाव नहीं किया और नरम रुख को बरकरार रखा है। आरबीआई गवर्नर ने पर्याप्त नकदी सुनिश्चित कर कर्ज सुलभ कराने तथा एनएचबी को 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसका लाभ रियल एस्टेट क्षेत्र को मिलना चाहिए जो परियोजनाओं के लिये कोष को लेकर परेशान है।’’
सीबीआरई इंडिया के चेयरमैन और सीईओ (दक्षिण पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमन मैगजीन ने कहा कि आरबीआई ने मुद्रास्फीति लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने के साथ आर्थिक पुनरूद्धार सुनिश्चत करने के उद्देश्य के साथ यह निर्णय किया है।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने एनएचबी को 10,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने समेत वित्तीय संस्थानों के लिये विशेष नकदी सुविधाओं की घोषणा की है। इन उपायों से रियल एस्टेट क्षेत्र के पुनरूद्धार में मदद मिलेगी।

नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा, ‘‘आरबीआई ने रेपो दर को बरकरार रखा है। यह कर्ज की गति बनाये रखने का संकेत है। साथ ही वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 10.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है जो यह बताता है कि भारत में आर्थिक पुनरूद्धार बेहतर है।’’
टाटा रियल्टी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. के प्रबंध निदेशक और सीईओ संजय दत्त ने कहा कि यह लगातार पांचवीं बार है जब रेपो में बदलाव नहीं करते हुए रुख को नरम बनाये रखा गया है। यह निश्चित रूप से दीर्घकाल में क्षेत्र के पुनरूद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नाइट फ्रैंक इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री और राष्ट्रीय निदेशक रजनी सिन्हा ने कहा कि , ‘रिजर्व बैंक के आवास क्षेत्र को कर्ज सुविधा बढ़ानेवाले कदम आत्मविश्वसा बढ़ाने वाले हैं।’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) को वित्तीय सहयाता देकर उसके जरिए आवस क्षेत्र के लिए धन का प्रवाह बढ़ाने का उपाय किया है। इसी तरह आवस ऋण देने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंकों से मिलने वाले कर्ज को प्राथमिकता क्षेत्र के कर्ज की परिभाषा में रखने की अवधि बढ़ाने का निर्णय भी किया गया है। इससे संकट के इस दौर में रीयल एस्टेट क्षेत्र को सहारा मिलेगा।

गौड़ समूह के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ ने आरबीआई की घोषणाओं का स्वागत किया लेकिन कहा कि क्षेत्र को पटरी पर लाने के लिये और उपाय किये जाने की जरूरत है।

हाउसिंग डॉट कॉम और प्रोप टाइगर के सीईओ ध्रुव अग्रवाल ने कहा कि आरबीआई का निर्णय उम्मीद के अनुरूप है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि बैंक आरबीआई के नीतिगत दर को यथावत रखने के कदम को समझेंगे और मकान खरीदारों को निम्न ब्याज दर पर कर्ज देना जारी रखेंगे।

एनरॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि आवास ऋण पर ब्याज दर स्थिर बनी रह सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि निम्न ब्याज (6.7 प्रतिशत से शुरू) के लिये प्रोत्साहन अवधि 31 मार्च को समाप्त हो गयी है। एसबीआई पहले ही सामान्य ब्याज दर को अपना चुका है। अन्य बैंक भी यह कदम उठा सकते हैं। इससे मकान की मांग पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है....।’’

यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।