newsdog Facebook

किसानों की बढ़ी चिंता, इफको ने डीएपी के दाम में 58 फीसदी की बढ़ोतरी की

Punjab Kesari 2021-04-08 16:53:42

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं, दूसरी ओर खेती के लिए अति महत्वपूर्ण रासायनिक खाद डाई अमोनियम फास्फेट या DAP के दामों में बढ़ौत्तरी कर दी गई है।


नेशनल डेस्क : देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं, दूसरी ओर खेती के लिए अति महत्वपूर्ण रासायनिक खाद डाई अमोनियम फास्फेट या DAP के दामों में बढ़ौत्तरी कर दी गई है। सहकारी क्षेत्र के इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोओपरेटिव (IFFCO) ने 50 किलो वाले डीएपी खाद की कीमत में 58.33 फीसदी बढ़ौत्तरी कर दी है। साफ शब्दों में बताएं तो जो बोरी पिछले महीने 1,200 रुपये में मिलती थी, अब उसकी कीमत 1,900 रुपये कर दी गई है। 

कंपनियों ने पहले ही बढ़ा दिए दाम
IFFCO तो सहकारी क्षेत्र की कंपनी है, जिस पर काफी हद तक सरकार की मर्जी चलती है। लेकिन, निजी क्षेत्र की कंपनियों ने तो पिछले महीने ही 50 किग्रा के बैग की कीमत 300 रुपये बढ़ा दी थी। उस समय डीएपी के 50 किग्रा के एक बैग की कीमत 1200 रुपये थी तो निजी क्षेत्र की पारादीप फॉस्फेट लिमिटेड (PPL) और गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स कॉर्पोरेशन (GSFC) ने इसका प्रिंट रेट 1,500 रुपये कर दिया था। अब जबकि इफको ने ही इसका दाम 1,900 रुपये कर दिया है तो अन्य कंपनियां भी ऐसा ही करेंगी।

इन कारणों से बढ़े दाम
इफको के अधिकारी बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीएपी में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फेट की कीमत चढ़ने से यह परिस्थितियां पैदा हुई हैं। उनका कहना है कि देश में इसकी उपलब्धता काफी कम है। इसलिए ये दोनों उत्पाद बाहर से मंगाए जाते हैं।

किसानों का कहना है कि अब डीएपी की मुख्य मांग जून-जुलाई में खरीफ की फसलों की बुवाई के दौरान होगी। इस समय गन्ना, मूंग, मेंथा और सब्जियों की फसलों में ही डीएपी की जरूरत है, जोकि बहुत अधिक नहीं होती है। इस कारण रेट बढ़ने पर भी किसी तरह का पैनिक नहीं फैलेगा। लेकिन खरीफ की बुवाई शुरू होते ही हाहाकार मचेगा। इसका इस्तेमाल कितना होता है, इसका अंदाजा सिर्फ उत्तर प्रदेश से ही मिल जाता है। यूपी में ही खरीफ सीजन में डीएपी की आपूर्ति का लक्ष्य औसतन 12 लाख टन का रहता है।