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तो इस कारण से SRH ने छीनी डेविड वॉर्नर की कप्तानी!

Hindi Khabar 2021-05-02 05:22:00

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नई दिल्ली: शनिवार को तब सनराइजर्स हैदराबाद (Sunrisers Hyderabad) के तमाम चाहने वाले तब हैरान रह गए, जब हैदराबाद की फ्रेंचाइजी ने डेविड वॉर्नर (David Warner) को कप्तानी पद से हटा दिया. इस सीजन में हैदराबाद टूर्नामेंट की शुरुआत से ही खासा संघर्ष कर रहा है। वॉर्नर की कप्तानी में टीम अभी तक खेले गए छह मैचों में से पांच हार के साथ प्वाइंट्स टेबल में सबसे फिसड्डी बनी हुई है। सभी का अंदाजा था कि शायद वॉर्नर को उनकी कप्तानी में टीम के खराब प्रदर्शन के कारण हटाया गया है, लेकिन अब वॉर्नर को कप्तानी से हटाए जाने की असल वजह सामने आयी है।

दरअसल पिछले रविवार को हैदराबाद सुपर ओवर में दिल्ली से हार गया था. हार के बाद डेविड वॉर्नर के फैसले और रणनीति पर सवाल खड़े हुए। इसका कारण था कि उन्होंने सुपर ओवर में जॉनी बैर्यस्टो को पारी शुरू करने नहीं भेजा। इस फैसले का विरोध सहवाग सहित कई दिग्गज खिलाड़ियों ने किया। सभी डेविड पर बुरी तरह से भड़क गए थे. वॉर्नर भी काफी दबाव में थे. लेकिन इसके बाद उनसे एक और बड़ी गलती हो गयी. दरअसल वॉर्नर ने इसे रणनीतिक गलती न मानते हुए मैच के प्लेयिंग इलेवन से मनीष पांडे को बाहर करने के लिए टीम के सेलेक्टरों पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े कर दिए थे।

लगता है वॉर्नर की ये गलती उनके लिए मुसीबत बन गयी है। हैदराबाद मैनजमेंट ने इस गलती को वॉर्नर की एक बड़ी गलती माना। वॉर्नर ने सार्वजनिक तौर से 'सेलेक्टरों' शब्द का उल्लेख किया था, लेकिन उनका मतलब कोई नहीं समझ पाया कि ये सेलेक्टर कौन हैं।

वॉर्नर ने खुद को की कप्तानी से हटाए जाने पर कहा है कि मेरी राय में यह एक बड़ा फैसला है, लेकिन आखिरकार यह सेलेक्टरों का निर्णय है।

वॉर्नर के सवालों में है दम!

अगर वॉर्नर ने मनीष पांडे को लेकर ये कहा था, तो उनके सवाल में दम है क्योंकि केवल मनीष पांडे ही एक ऐसे प्लेयर हैं, जिनके नाम पर हैदराबाद की ओर से फिलहाल सबसे ज्यादा रन हैं। मनीष द्वारा खेले गए चार मैचों की इतनी ही पारियों में पांडे ने 54.00 के औसत से 162 रन बनाए। उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 61 रन है। ऐसे में जब वॉर्नर इस बात पर सवाल खड़े कर रहे हैं कि मनीष पांडे को क्यों बाहर किया, तो शायद उनका यह पूछना गलत नहीं होगा। हो सकता है कि क्लोज-डोर मीटिंग में मैनेजमेंट को मनाने में नाकाम रहे वॉर्नर ने निराशा में यह कदम उठाया होगा, जिसे मैनेजमेंट ने अनुशासनहीनता के रूप में लिया होगा।